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किमी से अधिक पदयात्रा कर देशभर मे अपनी विशिष्ट शैली में जिन-धर्म प्रभावना
छात्र-छात्राओं को एक साथ सम्बोधित कर उनके ज्ञान चक्षु खोलना
से अधिक साहित्यों एव गद्य- पद्य
कृतियों की रचना
ध्यान योग व शिक्षण शिविर में अब तक लगभग साधर्मी बंधुओं का प्रेरणास्पद पथ प्रदर्शन
पूज्य गुरु माँ से प्रेरणा पा अनेकों जैन व् जैनेत्तर महानुभावों ने धर्म , प्रोफेशनल स्टडीज, कला, खेल, व्यावसाय आदि क्षेत्रों में खुद को स्थापित किया और उसका पूर्ण निष्ठा से निर्वहन कर रहे हैं और प्रगति पर अग्रसर होने हेतु पूज्य माता जी से समय समय पर प्रेरणा व आशीर्वचन लेते रहते हैं|
अगर देखा जाये तो वास्तविकता में प्रेरित वो ही कर सकते हैं जो स्वयं में प्रेरणा हों, और पूज्य गुरु माँ इस बात का जीवंत व् साक्षात उदहारण हैं, गुण रत्नो की खान नारी जाती की आभूषण गुरु माँ गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण, हम सोच में भी जिसकी परिकल्पना नहीं कर सकते उसको मूर्त रूप प्रदान कर एक विश्व कीर्तिमान स्थापित किया |
वह कीर्तिमान जहाज़ के रूप में विश्व का सबसे बड़ा मंदिर स्वस्तिधाम जहाजपुर में बना, जहां भूगर्भ से प्रगटित चिंतामणि विघ्नहर सर्वारिष्ट निवारक श्री 1008 मुनिसुव्रतनाथ भगवान् विराजमान हैं, यह जिनालय आज सैंकड़ो, हज़ारों धर्मावलम्बी बंधुओं की आस्था का केंद्र बन चुका है, जहां एक ओर श्रद्धा के उत्तुंग शिखर को यह भव्य जिनालय छू रहा है वहीँ दूसरी ओर इसकी बनावट व शिल्पकला ने अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में India Book Of Records और Golden Book of World Records में दर्ज करा लिया है |
यह सब पूज्य गुरु माँ की लगनशीलता और जिनेन्द्र चरणों में निस्वार्थ व् अटूट श्रद्धा का ही परिणाम है और भी अनेकों बातें हैं जो हमें पूज्य गुरु माँ से प्रेरणा लेने को इंगित करती हैं जैसे